चेचक से बचने के लिए अपनाएं ये तरीके
चेचक एक फैलने वाली बिमारी है। जिससे शरीर पर छाले की तरह दाने बनते हैं और उनमें खुजली होती है। चिकनपॉक्स को छोटी माता भी कहते हैं। इसमें बुखार के साथ-साथ शरीर पर लाल रंग के दाने हो जाते हैं। यह बीमारी ठीक होने के बाद दाने सूख कर झड़ जाते हैं लेकिन इसके निशान रह जाते हैं। चेचक के टीके चेचक और उसकी संभावित जटिलताओं को रोकने के लिए एक सुरक्षित और प्रभावी तरीका है।
क्यों होता है चिकनपॉक्स
चेचक रोग के लिए वेरिसेला जोस्टर मुख्य रुप से जिम्मेदार होता है। ज्यादातर मामलों में यह संक्रमित व्यक्ति से अन्य लोगों में फैलती है। यह सलाइवा, छींकने और संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आने से फैलता है।
चेचक के लक्षण
अगर चेचक रोग हो तो प्यास ज्यादा लगती है और पूरे शरीर में दर्द होने लगता है। इसमें बुखार होने के साथ शरीर का तापमान बढ़ जाता है। ह्रदय की गति भी तेज होने लगती है। धीरे-धीरे शरीर पर लाल रंग के दाने निकलने लगते हैं जो पकने के बाद सूख जाते हैं लेकिन शरीर पर दाग रह जाते हैं। दानों के साथ, चक्कर आना, दिल की धड़कनों का तेज होना, सांस तेजी से चलना, कांपना, मांसपेशियों में समन्वय के नुकसान की तकलीफ, बिगड़ती खांसी, उल्टी, गर्दन में अकड़न या बुखार तेज होना।
उपचार
एक चम्मच बेकिंग सोडा को एक गिलास पानी में घोलकर, इस पानी को रूई की सहायता से शरीर पर लगाएं। चेचक से निजात मिलेगी।
पीपल की 3 या 5 पत्तियां लें, पत्तियों की डंडी तोड़ दें, इन पत्तों को 1 गिलास पानी में उबाले और एक चौथाई रहने पर इस को गुनगुना ही रोगी को पिलाएं। ऐसा 3 से 5 दिन तक हर रोज़ सुबह और शाम को करें। इससे चेचक, टाईफ़ाएड, और खसरा और आम बुखार में बेहद लाभ मिलता हैं।
एलोवेरा का ताजा रस निकालकर दानों पर लगाएं।
खुजली से बचने के लिए शरीर को ठंडा रखें। हल्के कपड़े पहनें और गरम पानी से नहाने से बचें।
लहसुन की कुछ कलियों को पीसकर इसका रस निकाल लें और इसे दिन में 2-3 बार निशानों पर लगाएं। इससे कुछ ही मिनटों में चेहरा साफ हो जाएगा।
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